Friday, February 25, 2011

मच्छर का डंक और जुर्माने की पर्ची

जब से मच्छरजनित बीमारियों से लोगों के मरने की ख़बरें आ रही हैं, तब से मुझे हर वक़्त खटका सा लगा रहता है। पानी देखते ही मेरा दिल बैठ जाता है। कूलर को सुखाते-सुखाते मैं खुद सूख गया हूं, लेकिन मच्छर जाने का नाम ही नहीं ले रहे। हर जगह उनके होने का अहसास बना रहता है, चाहे रात हो या दिन। घर में, दफ़्तर में, दुकान में हर जगह लगता है कि मच्छर मेरा पीछा कर रहे हैं। हर आवाज़ मच्छर की भिनभिनाहट जैसी लगती है। कई बार तो गाना सुनते हुए अचानक लगता है जैसे मच्छर संगीत बजने लगा हो और मैं चौंक कर इधर-उधर देखने लग जाता हूं। मैं इस नतीजे पर पहुंचने लगा हूं कि दुनिया में सबसे बड़ी सत्ता मच्छर सत्ता है। इसे मिटा पाना आसान नहीं।

एक दिन इसी उधेड़बुन में डूबा था कि झपकी आ गई। थोड़ी ही देर बाद ज़ोर की आवाज़ सुनकर उठ बैठा। देखता क्या हूं कि एक भयानक सा मच्छर मेरे सामने दहाड़ रहा है क्रूर हत्यारे, नराधम तूने मेरे भाई के प्राण क्यों लिए?” मैं डर गया। थूक निगलते हुए याचना की भइया! मैंने तो अपनी ज़िंदगी में किसी भी जीव की हत्या नहीं की। मैं वाकई सच बोल रहा था, क्योंकि मेरा मानना है कि हरेक जीव में ईश्वर का अंश है और मच्छर भी उसी ईश्वर की संतान हैं। मैं इसलिए भी डरता हूं कि अगर मैं किसी मच्छर को मारुंगा तो हो सकता है कि अगले जनम में मैं मच्छर ही बन जाऊं या जिस मच्छर को मैं मारूं वो पिछले जनम का मेरा ही कोई रिश्तेदार, दोस्त वगैरह निकल जाए। ईश्वर की माया को कोई समझ पाया है क्या!

कुपित मच्छर
इसलिए मैंने उस कुपित मच्छर को समझाया देखिए...मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।

तो फिर ये दवा किसने छिड़की है?” मच्छर का डंक क्रोध के मारे कांप रहा था।

ओहो...वो, वो तो एमसीडी वालों ने छिड़की है। उस पर इसका कोई असर ना हुआ। हूं...एमसीडी वाले भी कुछ करते हैं भला!” उसने ये कहा ही था कि दरवाज़े पर एमसीडी वाले प्रकट हो गए। उन्हें देखते ही मच्छर को पता नहीं क्या सूझा कि उसने अब मज़ा चखाता हूं कहते हुए मेरे गाल पर काट लिया और एमसीडी वालों के सामने नाचने लगा।

मच्छर देखते ही एमसीडी वाले ऐसे चिहुंक उठे मानो तेलगी का गड़ा ख़ज़ाना पा लिया हो। उनमें से एक अधिकारीनुमा व्यक्ति ने मुझसे प्रश्न किया ये मच्छर आपने पैदा किया है। मैंने सहमकर जवाब दिया भला में क्यों पैदा करता! मेरे ऐसे विवाहेतर संबंध नहीं हैं...वैसे ये पड़ोस से भी तो आया हो सकता है...जैसे आप आए हैं। इस बीच उनमें से एक व्यक्ति ने लपककर उस शातिर मच्छर को एक परखनली में बंद कर लिया। या यूं कहिए कि वो खुद ही उसमें जा घुसा। अधिकारीनुमा व्यक्ति बोला हम इसे लैब में टेस्ट करेंगे और अगर इसकी रगों में आपका खून पाया गया तो आपकी खैर नहीं।

कहकर वो चल दिए। परखनली में बंद मच्छर मेरी ओर विजयी मुस्कान के साथ देख रहा था। मैं मच्छर के काटे का कोई मंतर सोच ही रहा था कि जो एमसीडी वाले लाख जप-तप करने के बाद भी दर्शन नहीं देते, कुछ ही घंटों बाद बेहद उल्लासपूर्वक वापस आ धमके और आते ही मुझ पर मच्छरपात कर दिया।

आपको पता है वो मच्छर कौन सा है। मैं भी तपा बैठा था, बोला मैं क्या मच्छरों का नाम, पता पूछकर रखता हूं। अधिकारीनुमा व्यक्ति आंखें तरेरते हुए बोला नाम, पता सब पता चल जाएगा। आपको काटने वाला मच्छर एडीस है और वो सरकारी गवाह बन गया है। उसने बयान दिया है कि आपने मच्छरों के लिए तीन कूलर और चार टायर रखे हुए हैं। उसने मातहतों को आदेश दिया इन्हें जुर्माने की पर्ची थमाओ और घर में धुआं छोड़ो। धुएं के असर से मैं अचेत हो गया। थोड़ी देर बाद जब होश आया तो मैंने चारों ओर मच्छरों को अट्टहास करते और नाचते-गाते पाया। मैंने जुर्माने की पर्ची पर नज़र डाली और एक बार फिर अचेत हो गया।
-नवभारत टाइम्स, 27 अक्टूबर 2006

क्रीमी लेयर रंग फ़ेयर ही फ़ेयर

आज मुकदमे का पांचवां दिन था। अदालत खचाखच भरी हुई थी। कहीं पैर रखने की जगह तक नहीं थी। बाहर मीडिया के लोगों का हुजूम था। सभी लोग सांस रोके फैसले का इंतज़ार कर रहे थे। मुकदमा था क्रीम चुराने का। दो लड़कों ने मर्द होते हुए भी लड़कियों वाली फ़ेयरनेस क्रीम चुराई थी और वे रंगे चेहरे पकड़े गए थे। अदालत में सरकारी वकील की आवाज़ गूंजी ये कोई ऐसी-वैसी क्रीम नहीं है माई लॉर्ड। इसे लगाकर लड़कियां गोरी हो जाती हैं, वो काबिल हो जाती हैं, उनमें आत्मविश्वास आ जाता है, उनकी नौकरी लग जाती है और उन्हें अच्छा वर मिल जाता है।

मर्दों वाली क्रीम

क्या ये सब क्रीम लगाने से होता है!” जज साहब ने अचरज से पूछा। जी माई लॉर्ड! जब तक लड़की इस क्रीम को नहीं लगाती, उसकी शादी नहीं होती। क्रीम लगाते ही लड़कों की लाइन लग जाती है। माई लॉर्ड पहले लड़के लड़कियों की नींद चुराते थे, उनकी आंखों से काजल चुराते थेऔर आजकल के ये लड़के उनकी फ़ेयरनेस क्रीम चुराने में लगे हैं। जज साहब ने आवेशित स्वर में कहा इस देश में ये सब क्या हो रहा है। मर्द लड़कियों की क्रीम चुरा रहे हैं, पुलिस अफ़सर राधा बनकर नाच रहे हैं, शाहरुख़ ख़ान औरतों की तरह टब में नहा रहा है...आख़िर इस देश के मर्दों को हो क्या गया है।

सरकारी वकील कठघरे में सिर झुकाए खड़े दोनों नौजवानों की ओर मुख़ातिब हुए तुम्हें अपनी सफ़ाई में कुछ कहना है...। अपनी सफ़ाई के लिए ही तो क्रीम चुरा रहा था। सांवले लड़के ने कातर पुकार की। वकील साहब गुर्राए जो पूछा जा रहा है उसका ठीक-ठीक जवाब दो। अबकी बार दूसरा लड़का बोला माई लॉर्ड सच्चाई ये है कि हम दोनों गोरा होना चाहते थे, क्योंकि इस देश में सबसे ज़्यादा पूछ अंग्रेज़ी बोलने वालों और गोरे रंग वालों की हैइंगलिश स्पीकिंग कोर्स में तो हमने दाखिला ले लिया था, बस रंग रह गया था। उसी के लिए हम ये क्रीम...कहते-कहते लड़के का गला भर आया। अदालत में सभी की नज़रें लड़के पर जमी हुई थीं। उसने थोड़ा संभलकर कहा माई लॉर्ड, हमारा गुनाह सिर्फ़ इतना है कि हमें पता नहीं था कि मार्केट में मर्दों वाली फ़ेयरनेस क्रीम भी आ चुकी है, वरना हम ऐसा क्राइम कभी ना करते।

दूसरा लड़का उत्तेजित होकर बोला वकील साहब मैं आपसे पूछता हूं, क्या आपने कभी कोई क्रीम नहीं लगाई? मैं अदालत में मौजूद हर इंसान से पूछना चाहता हूं क्या उसने कभी कोई क्रीम नहीं लगाई? बताइए आप लोग चुप क्यों हैं? दूसरे लड़के ने उसे रोकना चाहा ये क्या कर...” “मुझे बोलने दे यार, क्रीम ना चुरा ली कोई एटम बम बनाने का प्लान चुरा लिया। मैं अब चुप नहीं रहूंगा। जज साहब अपने गाल पर हाथ रखकर कसम खाइए, क्या आपने कभी कोई फ़ेयरनेस क्रीम नहीं लगाईक्या आप गोरा नहीं होना चाहते थे?” कहते-कहते नौजवान रोने लगा। अदालत में सन्नाटा छा गया। सभी लोग स्तब्ध रह गए। वकील साहब बारी-बारी से अपनी दोनों बगलें झांकने लगे। वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों में नमी उतर आई थी। क्रीम को लेकर उन्होंने कभी इस तरह नहीं सोचा था। पता नहीं जज साहब क्या फ़ैसला सुनाएंगे।

मगर ये क्या...जज साहब भी अपनी आंखें पोंछ रहे थे। उन्होंने रुंधे गले से बोलना शुरू किया इस नौजवान ने आज अदालत की आंखें खोल दीं। ये अदालत आज तक सभी क्रीमों को एक ही समझती आई थी। मैं इस नौजवान के दर्द को महसूस कर सकता हूं। अदालत इन्हें बाक्रीम बरी करती है और सरकार को आदेश देती है कि हर्जाने के तौर पर इन्हें दस किलो क्रीम दे, ताकि इन्हें ज़िंदगी में कभी भी क्रीम की वजह से बुरे दिन ना देखने पड़ें। सरकार का फ़र्ज़ है कि वो बेरोजगार युवकों को क्रीम पर सब्सिडी देने का बंदोबस्त करे, ताकि इस देश के किसी भी नौजवान को महज सांवले रंग की वजह से कोई नुकसान ना उठाना पड़े।
-नवभारत टाइम्स, 9 दिसंबर, 2005

Thursday, February 24, 2011

सलेम भाई जेल में जास्ती फिकर नई करने का

भाई को हैलो बोले तो सलाम। भाई तुम इदर से चला गया तो अपुन को मजा नई आया। भाई, तुम इदर से कल्टी काए को हो गया था। इंडिया में तेरे कू किस लुक्के का डर था। इदर कोई किसी का कुछ नई बिगाड़ सकता भाई। खाली-पीली अक्खा दुनिया में धक्के खाए। अब दुनिया बोल रयेली है- लौट के बुद्धू घर कू आए। क्या भाई, हमें मालूम नई था कि एक दिन भाई लोगों को भी पब्लिक अईसे कड़वे डायलॉग मारेगी। वैसे, घबराने का नई। इदर गली-गली में किसिम-किसिम का भाई लोग है, क्या सबको फांसी हुआ। और वो पुर्तगाली सरकार काए के वास्ते इत्ती चीं-पों कर रेली है कि फांसी नई देना, फांसी नई देना। जइसे कि इतर इंडिया में रोज दर्जन भर लोगों को फांसी होता है।


भाई और मोनिका भाभी

भाई, वइसे जब तुम उदर था, तो इदर अपना खुल्ला खेल चल रिया था। पन पीछे का दस-पंद्रह सालों में तो हदईच हो गयेली है बाप। कइसा बी काम करो, किसी का भी पुंगी बजाओ, किसी का भी बीड़ी-सुपारी लो, कोई टेंशन नई भाई, अपुन के भाई लोगों में से कोई बम फोड़ रिया है, कोई दंगा करवा रयेला है, कोई मुंबई की फिल्मों में नाक घुसेड़ रिया है, कोई घोटाला कर रयेला है- अक्खा इंडिया में अपना भाई लोग भरा पड़ा है। पन अभी अपुन ने तेरे को जो घासलेट दिया, ये तेरे भेजे में नई जा रिया होइंगा। तू सोचेंगा कि ये सब लुक्कागिरी क्या सचमुच भाई लोग कर रिए हैं। जास्ती टेंसन नई लेने का भाई। अपने भेजे को लंबी छुट्टी पे भेज देने का। जइसे इंडिया में बड़े घोटालों में धरे गए बड़े अफसर लोगों को लंबी छुट्टी पे भेजने का पुराना रिवाज है।

असल बात ये है कि सभी किसिम के भाई लोग मिलके आल इंडिया भाई लोग नो टेंसन एसोसिएसन बनाएला है। और तेरे को मालूम क्या, एसोसिएसन का फुटपाथ सफाई सेल का सेकरेटरी कौन है। अरे वोइच जो पांच-दस फालतू लोगों को कार से उड़ा देता और केस चलता तो कार का ट्रक बना देता। अब जस्टिस बाबू चक्कर में, कार वाले के बजाय ट्रक वाले को सजा कैसे दें। पन भाई इदर एसोसिएसन में कुछ ज्यादाइच पोलिटिक्स चल रएला है। सुपारी खोखा पे तो इदर कोई भी फालतू में आ जा रिया है। छोकरा लोगों का मूंछ आया नई पन रामपुरिया जेब में है। फिलिम का हीरो बनने का यईच शॉर्टकट है उनका।

भाई तुम तो भाभी को बी साथ में लाएला है। सुना है भाभी जास्ती टेंसन में आके डबल रोल मार रएली है। लफड़ा क्या है भाई। क्या सच्ची में तू उससे शादी नई बनाएला था। भाई तभी तो कहता हूं कि फिलिम के लोगों पे जास्ती भरोसा नई करने का। तेरे कू तो मालूम होएंगा कि संजू बाबा और उसके तीन दोस्तों से अपुन लोग की मुहब्बत की दास्तान पुलिस टेप की थी। संजू तो बोल दिया कि वो सब बात नशे में किएला था। पन सब संजू बाबा नई हैं ना। किसी ने अगर सच्चाई की उल्टी कर दी तो। छोड़ भाई, मैं भी क्या टेंसन ले रिया हूं। किसी का आज तलक कुछ बिगड़ा है क्या। अदालतों में करोड़ों केस हैं। तेरा भी केस लग जाएगा। उदर जज लोगों के बैठने की जगहइच नई है।

वइसे भी इदर की पुलिस गरीबों को ठिकाने लगाने में ही उस्ताद है। अपुन लोगों से उसकी पुरानी यारी है। तेरा केस बी अदालत में चलेंगा तो चलताइच रहेंगा। एक से दूसरा अदालत, दूसरे से तीसरा। इस बीच जनता में अपना फैन लोगों का नंबर बढ़ताइच जाएगा। वइसे भी भाई, लोग मिनिस्टर लोगों को उतना नई जानते जितना तेरे कू जानते हैं। अब बोले तो, स्वास्थ्य और कल्याण के मंत्री को किसी को जानने की जरूरत ही क्या है। पन भाई को ना जानना मतलब जनरल नॉलेज जीरो होना। कॉलेज के छोकरे लोगों के लिए इससे बड़ी बेइज्जती की बात क्या होगी। छोकरी लोग भाई के बारे में पूछ ली तो। अपुन जेल में तेरे वास्ते सारे बंदोबस्त करेला है। टीवी, फ्रिज, कमोड वो भी अंग्रेजी इस्टाइल का रखा है भाई। तेरे कू उदर कोई टेंसन नई मांगता। बाकी नेक्सट संडे मैं तेरे कू मिलने को आएंगा।
-नवभारत टाइम्स, 25 नवंबर 2005
सदी के महाकिसान का काकोरी कांड
लो जी आखिरकार सदी के महानायक सदी के महाकिसान बन ही गए। इस बार अमिताभ ने उन सभी लोगों की बोलती बंद कर दी जो उन्हें फ़र्ज़ी किसान बता रहे थे। अबकी बार अमिताभ ने बाकायदा ट्रैक्टर पर बैठकर फोटो भी खिंचवाई, इससे एक फ़ायदा ये हुआ कि लगे हाथों उनके समधी जी की कंपनी के ट्रैक्टर का विज्ञापन भी हो गया। लखनऊ के काकोरी गांव में बीज भी उन्होंने खुद ही बोया और खाद भी खुद ही डाला। इसलिए कुछ लोग इसे दूसरा काकोरी कांड भी बता रहे हैं। बहरहाल, अखबारों के हवाले से पता चला है कि अमिताभ के साथ-साथ अभिषेक और जया भी यूपी में बीज उत्पादक किसान के तौर पर रजिस्टर्ड हो गए हैं। इस तरह अमिताभ के किसान बनने से हमारे देश के बाक़ी किसानों को भी पता चल गया कि भैय्या किसानों का भी रजिस्ट्रेशन होता है। बेचारों की पीढ़ियां खेती-किसानी करते मर खप गईं पर वोटर लिस्ट के अलावा और किसी लिस्ट में कभी उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ।
वैसे भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है कि वहीं खेत में ही बच्चन परिवार में दरार पैदा हो गई। अभिषेक ने इस मुद्दे पर पा के ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी है। उन्होंने अमिताभ को साफ़-साफ़ कह दिया है कि आपको किसान बनना है तो बेशक बनिए लेकिन मुझे बख्शिए। वैसे भी आप तो वन-मैन इंडस्ट्री रहे हैं, इसलिए ये काम भी आप अकेले ही कीजिए। अमिताभ ने अभिषेक को समझाया कि बेटा इस किसानगीरी में पूरे परिवार को मिल-जुलकर काम करना पड़ता है, फिर भी गुज़ारा नहीं चलता। हमें तो पहले ही दिन ट्रैक्टर भी मिल गया, नहीं तो ज़्यादातर किसान तो ट्रैक्टर के सिर्फ़ सपने ही देखते रह जाते हैं। और वैसे भी मैं यही चाहता हूं कि तुम भी वही काम करो जो मैं करता हूं, चाहे तुम्हें आए या ना आए। यहां मुंबई में तो कोई तुम्हारा आटोग्राफ़ लेता नहीं, हो सकता है कि गांववाले ही ले लें। लेकिन बिग बी की इन सब बिग दलीलों का अभिषेक पर कोई असर नहीं पड़ा। अभिषेक ने कहा पा इस किसानगीरी में हमें इस बार भी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते हैं, और ऐसे में अमर चाचा बहुत काम आएंगे। वो जज वगैरह से आपकी सेटिंग भी करा सकते हैं। अमिताभ बोले बेटा ऐसा है कि...लेकिन अभिषेक ने उन्हें बीच में ही टोक दिया पा उधर राज ठाकरे के भी फोन आ रहे हैं, वो कह रहे हैं कि अच्छा बेटा अब तुम लोग किसान भी यूपी के ही बन गए। वापस मुंबई आओ, तुमसे मनसे स्टाइल में हल जुतवाएंगे। ठाकरे का नाम सुनते ही अमिताभ के पैरों तले से बीज, खाद और ज़मीन सब खिसक गए। अभिषेक ने आगे कहा और पा, ऐश्वर्या भी खेती-बाड़ी करने से मना कर रही है। वो कहती है कि मैं तुम बाप-बेटे के साथ कजरारे-कजरारे तो कर सकती हूं पर ये खेती-वेती मेरे बस का काम नहीं है। अभिषेक की इन सब बातों को सुनकर एंग्री यंग मैन से कूल ओल्ड मैन बन चुके अमिताभ ने कहा लेकिन बेटा मेरे लिए खेत पर खाना लेकर कौन आएगा। इस पर अभिषेक के दिमाग़ में फिर एक आइडिया आया, उसने कहा पा फिर तो आप अमर चाचा को बुला ही लीजिए, वो ऐसा जुगाड़ करेंगे कि आपको कुछ भी करना नहीं पड़ेगा और बैठे-बिठाए बंपर फसल मिलेगी। आपको तो पता ही है कि वो कितने जुगाड़बाज़ आदमी हैं। बेटे के बग़ावती तेवर ढीले ना पड़ते देख अमिताभ को लगने लगा कि इस बार भी अपने छोटे भाई अमर की ही मदद लेनी पड़ेगी। यही सोचकर अमिताभ तभी से अमर को फोन लगाए जा रहे हैं, लेकिन उधर से कोई रेस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। सुना है वो राज ठाकरे के साथ बैठे चाय पी रहे हैं। लगता है किसान बनने का अमिताभ का सपना फिर टूट जाएगा।