Friday, February 25, 2011

मच्छर का डंक और जुर्माने की पर्ची

जब से मच्छरजनित बीमारियों से लोगों के मरने की ख़बरें आ रही हैं, तब से मुझे हर वक़्त खटका सा लगा रहता है। पानी देखते ही मेरा दिल बैठ जाता है। कूलर को सुखाते-सुखाते मैं खुद सूख गया हूं, लेकिन मच्छर जाने का नाम ही नहीं ले रहे। हर जगह उनके होने का अहसास बना रहता है, चाहे रात हो या दिन। घर में, दफ़्तर में, दुकान में हर जगह लगता है कि मच्छर मेरा पीछा कर रहे हैं। हर आवाज़ मच्छर की भिनभिनाहट जैसी लगती है। कई बार तो गाना सुनते हुए अचानक लगता है जैसे मच्छर संगीत बजने लगा हो और मैं चौंक कर इधर-उधर देखने लग जाता हूं। मैं इस नतीजे पर पहुंचने लगा हूं कि दुनिया में सबसे बड़ी सत्ता मच्छर सत्ता है। इसे मिटा पाना आसान नहीं।

एक दिन इसी उधेड़बुन में डूबा था कि झपकी आ गई। थोड़ी ही देर बाद ज़ोर की आवाज़ सुनकर उठ बैठा। देखता क्या हूं कि एक भयानक सा मच्छर मेरे सामने दहाड़ रहा है क्रूर हत्यारे, नराधम तूने मेरे भाई के प्राण क्यों लिए?” मैं डर गया। थूक निगलते हुए याचना की भइया! मैंने तो अपनी ज़िंदगी में किसी भी जीव की हत्या नहीं की। मैं वाकई सच बोल रहा था, क्योंकि मेरा मानना है कि हरेक जीव में ईश्वर का अंश है और मच्छर भी उसी ईश्वर की संतान हैं। मैं इसलिए भी डरता हूं कि अगर मैं किसी मच्छर को मारुंगा तो हो सकता है कि अगले जनम में मैं मच्छर ही बन जाऊं या जिस मच्छर को मैं मारूं वो पिछले जनम का मेरा ही कोई रिश्तेदार, दोस्त वगैरह निकल जाए। ईश्वर की माया को कोई समझ पाया है क्या!

कुपित मच्छर
इसलिए मैंने उस कुपित मच्छर को समझाया देखिए...मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।

तो फिर ये दवा किसने छिड़की है?” मच्छर का डंक क्रोध के मारे कांप रहा था।

ओहो...वो, वो तो एमसीडी वालों ने छिड़की है। उस पर इसका कोई असर ना हुआ। हूं...एमसीडी वाले भी कुछ करते हैं भला!” उसने ये कहा ही था कि दरवाज़े पर एमसीडी वाले प्रकट हो गए। उन्हें देखते ही मच्छर को पता नहीं क्या सूझा कि उसने अब मज़ा चखाता हूं कहते हुए मेरे गाल पर काट लिया और एमसीडी वालों के सामने नाचने लगा।

मच्छर देखते ही एमसीडी वाले ऐसे चिहुंक उठे मानो तेलगी का गड़ा ख़ज़ाना पा लिया हो। उनमें से एक अधिकारीनुमा व्यक्ति ने मुझसे प्रश्न किया ये मच्छर आपने पैदा किया है। मैंने सहमकर जवाब दिया भला में क्यों पैदा करता! मेरे ऐसे विवाहेतर संबंध नहीं हैं...वैसे ये पड़ोस से भी तो आया हो सकता है...जैसे आप आए हैं। इस बीच उनमें से एक व्यक्ति ने लपककर उस शातिर मच्छर को एक परखनली में बंद कर लिया। या यूं कहिए कि वो खुद ही उसमें जा घुसा। अधिकारीनुमा व्यक्ति बोला हम इसे लैब में टेस्ट करेंगे और अगर इसकी रगों में आपका खून पाया गया तो आपकी खैर नहीं।

कहकर वो चल दिए। परखनली में बंद मच्छर मेरी ओर विजयी मुस्कान के साथ देख रहा था। मैं मच्छर के काटे का कोई मंतर सोच ही रहा था कि जो एमसीडी वाले लाख जप-तप करने के बाद भी दर्शन नहीं देते, कुछ ही घंटों बाद बेहद उल्लासपूर्वक वापस आ धमके और आते ही मुझ पर मच्छरपात कर दिया।

आपको पता है वो मच्छर कौन सा है। मैं भी तपा बैठा था, बोला मैं क्या मच्छरों का नाम, पता पूछकर रखता हूं। अधिकारीनुमा व्यक्ति आंखें तरेरते हुए बोला नाम, पता सब पता चल जाएगा। आपको काटने वाला मच्छर एडीस है और वो सरकारी गवाह बन गया है। उसने बयान दिया है कि आपने मच्छरों के लिए तीन कूलर और चार टायर रखे हुए हैं। उसने मातहतों को आदेश दिया इन्हें जुर्माने की पर्ची थमाओ और घर में धुआं छोड़ो। धुएं के असर से मैं अचेत हो गया। थोड़ी देर बाद जब होश आया तो मैंने चारों ओर मच्छरों को अट्टहास करते और नाचते-गाते पाया। मैंने जुर्माने की पर्ची पर नज़र डाली और एक बार फिर अचेत हो गया।
-नवभारत टाइम्स, 27 अक्टूबर 2006

क्रीमी लेयर रंग फ़ेयर ही फ़ेयर

आज मुकदमे का पांचवां दिन था। अदालत खचाखच भरी हुई थी। कहीं पैर रखने की जगह तक नहीं थी। बाहर मीडिया के लोगों का हुजूम था। सभी लोग सांस रोके फैसले का इंतज़ार कर रहे थे। मुकदमा था क्रीम चुराने का। दो लड़कों ने मर्द होते हुए भी लड़कियों वाली फ़ेयरनेस क्रीम चुराई थी और वे रंगे चेहरे पकड़े गए थे। अदालत में सरकारी वकील की आवाज़ गूंजी ये कोई ऐसी-वैसी क्रीम नहीं है माई लॉर्ड। इसे लगाकर लड़कियां गोरी हो जाती हैं, वो काबिल हो जाती हैं, उनमें आत्मविश्वास आ जाता है, उनकी नौकरी लग जाती है और उन्हें अच्छा वर मिल जाता है।

मर्दों वाली क्रीम

क्या ये सब क्रीम लगाने से होता है!” जज साहब ने अचरज से पूछा। जी माई लॉर्ड! जब तक लड़की इस क्रीम को नहीं लगाती, उसकी शादी नहीं होती। क्रीम लगाते ही लड़कों की लाइन लग जाती है। माई लॉर्ड पहले लड़के लड़कियों की नींद चुराते थे, उनकी आंखों से काजल चुराते थेऔर आजकल के ये लड़के उनकी फ़ेयरनेस क्रीम चुराने में लगे हैं। जज साहब ने आवेशित स्वर में कहा इस देश में ये सब क्या हो रहा है। मर्द लड़कियों की क्रीम चुरा रहे हैं, पुलिस अफ़सर राधा बनकर नाच रहे हैं, शाहरुख़ ख़ान औरतों की तरह टब में नहा रहा है...आख़िर इस देश के मर्दों को हो क्या गया है।

सरकारी वकील कठघरे में सिर झुकाए खड़े दोनों नौजवानों की ओर मुख़ातिब हुए तुम्हें अपनी सफ़ाई में कुछ कहना है...। अपनी सफ़ाई के लिए ही तो क्रीम चुरा रहा था। सांवले लड़के ने कातर पुकार की। वकील साहब गुर्राए जो पूछा जा रहा है उसका ठीक-ठीक जवाब दो। अबकी बार दूसरा लड़का बोला माई लॉर्ड सच्चाई ये है कि हम दोनों गोरा होना चाहते थे, क्योंकि इस देश में सबसे ज़्यादा पूछ अंग्रेज़ी बोलने वालों और गोरे रंग वालों की हैइंगलिश स्पीकिंग कोर्स में तो हमने दाखिला ले लिया था, बस रंग रह गया था। उसी के लिए हम ये क्रीम...कहते-कहते लड़के का गला भर आया। अदालत में सभी की नज़रें लड़के पर जमी हुई थीं। उसने थोड़ा संभलकर कहा माई लॉर्ड, हमारा गुनाह सिर्फ़ इतना है कि हमें पता नहीं था कि मार्केट में मर्दों वाली फ़ेयरनेस क्रीम भी आ चुकी है, वरना हम ऐसा क्राइम कभी ना करते।

दूसरा लड़का उत्तेजित होकर बोला वकील साहब मैं आपसे पूछता हूं, क्या आपने कभी कोई क्रीम नहीं लगाई? मैं अदालत में मौजूद हर इंसान से पूछना चाहता हूं क्या उसने कभी कोई क्रीम नहीं लगाई? बताइए आप लोग चुप क्यों हैं? दूसरे लड़के ने उसे रोकना चाहा ये क्या कर...” “मुझे बोलने दे यार, क्रीम ना चुरा ली कोई एटम बम बनाने का प्लान चुरा लिया। मैं अब चुप नहीं रहूंगा। जज साहब अपने गाल पर हाथ रखकर कसम खाइए, क्या आपने कभी कोई फ़ेयरनेस क्रीम नहीं लगाईक्या आप गोरा नहीं होना चाहते थे?” कहते-कहते नौजवान रोने लगा। अदालत में सन्नाटा छा गया। सभी लोग स्तब्ध रह गए। वकील साहब बारी-बारी से अपनी दोनों बगलें झांकने लगे। वहां मौजूद सभी लोगों की आंखों में नमी उतर आई थी। क्रीम को लेकर उन्होंने कभी इस तरह नहीं सोचा था। पता नहीं जज साहब क्या फ़ैसला सुनाएंगे।

मगर ये क्या...जज साहब भी अपनी आंखें पोंछ रहे थे। उन्होंने रुंधे गले से बोलना शुरू किया इस नौजवान ने आज अदालत की आंखें खोल दीं। ये अदालत आज तक सभी क्रीमों को एक ही समझती आई थी। मैं इस नौजवान के दर्द को महसूस कर सकता हूं। अदालत इन्हें बाक्रीम बरी करती है और सरकार को आदेश देती है कि हर्जाने के तौर पर इन्हें दस किलो क्रीम दे, ताकि इन्हें ज़िंदगी में कभी भी क्रीम की वजह से बुरे दिन ना देखने पड़ें। सरकार का फ़र्ज़ है कि वो बेरोजगार युवकों को क्रीम पर सब्सिडी देने का बंदोबस्त करे, ताकि इस देश के किसी भी नौजवान को महज सांवले रंग की वजह से कोई नुकसान ना उठाना पड़े।
-नवभारत टाइम्स, 9 दिसंबर, 2005

Thursday, February 24, 2011

सलेम भाई जेल में जास्ती फिकर नई करने का

भाई को हैलो बोले तो सलाम। भाई तुम इदर से चला गया तो अपुन को मजा नई आया। भाई, तुम इदर से कल्टी काए को हो गया था। इंडिया में तेरे कू किस लुक्के का डर था। इदर कोई किसी का कुछ नई बिगाड़ सकता भाई। खाली-पीली अक्खा दुनिया में धक्के खाए। अब दुनिया बोल रयेली है- लौट के बुद्धू घर कू आए। क्या भाई, हमें मालूम नई था कि एक दिन भाई लोगों को भी पब्लिक अईसे कड़वे डायलॉग मारेगी। वैसे, घबराने का नई। इदर गली-गली में किसिम-किसिम का भाई लोग है, क्या सबको फांसी हुआ। और वो पुर्तगाली सरकार काए के वास्ते इत्ती चीं-पों कर रेली है कि फांसी नई देना, फांसी नई देना। जइसे कि इतर इंडिया में रोज दर्जन भर लोगों को फांसी होता है।


भाई और मोनिका भाभी

भाई, वइसे जब तुम उदर था, तो इदर अपना खुल्ला खेल चल रिया था। पन पीछे का दस-पंद्रह सालों में तो हदईच हो गयेली है बाप। कइसा बी काम करो, किसी का भी पुंगी बजाओ, किसी का भी बीड़ी-सुपारी लो, कोई टेंशन नई भाई, अपुन के भाई लोगों में से कोई बम फोड़ रिया है, कोई दंगा करवा रयेला है, कोई मुंबई की फिल्मों में नाक घुसेड़ रिया है, कोई घोटाला कर रयेला है- अक्खा इंडिया में अपना भाई लोग भरा पड़ा है। पन अभी अपुन ने तेरे को जो घासलेट दिया, ये तेरे भेजे में नई जा रिया होइंगा। तू सोचेंगा कि ये सब लुक्कागिरी क्या सचमुच भाई लोग कर रिए हैं। जास्ती टेंसन नई लेने का भाई। अपने भेजे को लंबी छुट्टी पे भेज देने का। जइसे इंडिया में बड़े घोटालों में धरे गए बड़े अफसर लोगों को लंबी छुट्टी पे भेजने का पुराना रिवाज है।

असल बात ये है कि सभी किसिम के भाई लोग मिलके आल इंडिया भाई लोग नो टेंसन एसोसिएसन बनाएला है। और तेरे को मालूम क्या, एसोसिएसन का फुटपाथ सफाई सेल का सेकरेटरी कौन है। अरे वोइच जो पांच-दस फालतू लोगों को कार से उड़ा देता और केस चलता तो कार का ट्रक बना देता। अब जस्टिस बाबू चक्कर में, कार वाले के बजाय ट्रक वाले को सजा कैसे दें। पन भाई इदर एसोसिएसन में कुछ ज्यादाइच पोलिटिक्स चल रएला है। सुपारी खोखा पे तो इदर कोई भी फालतू में आ जा रिया है। छोकरा लोगों का मूंछ आया नई पन रामपुरिया जेब में है। फिलिम का हीरो बनने का यईच शॉर्टकट है उनका।

भाई तुम तो भाभी को बी साथ में लाएला है। सुना है भाभी जास्ती टेंसन में आके डबल रोल मार रएली है। लफड़ा क्या है भाई। क्या सच्ची में तू उससे शादी नई बनाएला था। भाई तभी तो कहता हूं कि फिलिम के लोगों पे जास्ती भरोसा नई करने का। तेरे कू तो मालूम होएंगा कि संजू बाबा और उसके तीन दोस्तों से अपुन लोग की मुहब्बत की दास्तान पुलिस टेप की थी। संजू तो बोल दिया कि वो सब बात नशे में किएला था। पन सब संजू बाबा नई हैं ना। किसी ने अगर सच्चाई की उल्टी कर दी तो। छोड़ भाई, मैं भी क्या टेंसन ले रिया हूं। किसी का आज तलक कुछ बिगड़ा है क्या। अदालतों में करोड़ों केस हैं। तेरा भी केस लग जाएगा। उदर जज लोगों के बैठने की जगहइच नई है।

वइसे भी इदर की पुलिस गरीबों को ठिकाने लगाने में ही उस्ताद है। अपुन लोगों से उसकी पुरानी यारी है। तेरा केस बी अदालत में चलेंगा तो चलताइच रहेंगा। एक से दूसरा अदालत, दूसरे से तीसरा। इस बीच जनता में अपना फैन लोगों का नंबर बढ़ताइच जाएगा। वइसे भी भाई, लोग मिनिस्टर लोगों को उतना नई जानते जितना तेरे कू जानते हैं। अब बोले तो, स्वास्थ्य और कल्याण के मंत्री को किसी को जानने की जरूरत ही क्या है। पन भाई को ना जानना मतलब जनरल नॉलेज जीरो होना। कॉलेज के छोकरे लोगों के लिए इससे बड़ी बेइज्जती की बात क्या होगी। छोकरी लोग भाई के बारे में पूछ ली तो। अपुन जेल में तेरे वास्ते सारे बंदोबस्त करेला है। टीवी, फ्रिज, कमोड वो भी अंग्रेजी इस्टाइल का रखा है भाई। तेरे कू उदर कोई टेंसन नई मांगता। बाकी नेक्सट संडे मैं तेरे कू मिलने को आएंगा।
-नवभारत टाइम्स, 25 नवंबर 2005
सदी के महाकिसान का काकोरी कांड
लो जी आखिरकार सदी के महानायक सदी के महाकिसान बन ही गए। इस बार अमिताभ ने उन सभी लोगों की बोलती बंद कर दी जो उन्हें फ़र्ज़ी किसान बता रहे थे। अबकी बार अमिताभ ने बाकायदा ट्रैक्टर पर बैठकर फोटो भी खिंचवाई, इससे एक फ़ायदा ये हुआ कि लगे हाथों उनके समधी जी की कंपनी के ट्रैक्टर का विज्ञापन भी हो गया। लखनऊ के काकोरी गांव में बीज भी उन्होंने खुद ही बोया और खाद भी खुद ही डाला। इसलिए कुछ लोग इसे दूसरा काकोरी कांड भी बता रहे हैं। बहरहाल, अखबारों के हवाले से पता चला है कि अमिताभ के साथ-साथ अभिषेक और जया भी यूपी में बीज उत्पादक किसान के तौर पर रजिस्टर्ड हो गए हैं। इस तरह अमिताभ के किसान बनने से हमारे देश के बाक़ी किसानों को भी पता चल गया कि भैय्या किसानों का भी रजिस्ट्रेशन होता है। बेचारों की पीढ़ियां खेती-किसानी करते मर खप गईं पर वोटर लिस्ट के अलावा और किसी लिस्ट में कभी उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ।
वैसे भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है कि वहीं खेत में ही बच्चन परिवार में दरार पैदा हो गई। अभिषेक ने इस मुद्दे पर पा के ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी है। उन्होंने अमिताभ को साफ़-साफ़ कह दिया है कि आपको किसान बनना है तो बेशक बनिए लेकिन मुझे बख्शिए। वैसे भी आप तो वन-मैन इंडस्ट्री रहे हैं, इसलिए ये काम भी आप अकेले ही कीजिए। अमिताभ ने अभिषेक को समझाया कि बेटा इस किसानगीरी में पूरे परिवार को मिल-जुलकर काम करना पड़ता है, फिर भी गुज़ारा नहीं चलता। हमें तो पहले ही दिन ट्रैक्टर भी मिल गया, नहीं तो ज़्यादातर किसान तो ट्रैक्टर के सिर्फ़ सपने ही देखते रह जाते हैं। और वैसे भी मैं यही चाहता हूं कि तुम भी वही काम करो जो मैं करता हूं, चाहे तुम्हें आए या ना आए। यहां मुंबई में तो कोई तुम्हारा आटोग्राफ़ लेता नहीं, हो सकता है कि गांववाले ही ले लें। लेकिन बिग बी की इन सब बिग दलीलों का अभिषेक पर कोई असर नहीं पड़ा। अभिषेक ने कहा पा इस किसानगीरी में हमें इस बार भी कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते हैं, और ऐसे में अमर चाचा बहुत काम आएंगे। वो जज वगैरह से आपकी सेटिंग भी करा सकते हैं। अमिताभ बोले बेटा ऐसा है कि...लेकिन अभिषेक ने उन्हें बीच में ही टोक दिया पा उधर राज ठाकरे के भी फोन आ रहे हैं, वो कह रहे हैं कि अच्छा बेटा अब तुम लोग किसान भी यूपी के ही बन गए। वापस मुंबई आओ, तुमसे मनसे स्टाइल में हल जुतवाएंगे। ठाकरे का नाम सुनते ही अमिताभ के पैरों तले से बीज, खाद और ज़मीन सब खिसक गए। अभिषेक ने आगे कहा और पा, ऐश्वर्या भी खेती-बाड़ी करने से मना कर रही है। वो कहती है कि मैं तुम बाप-बेटे के साथ कजरारे-कजरारे तो कर सकती हूं पर ये खेती-वेती मेरे बस का काम नहीं है। अभिषेक की इन सब बातों को सुनकर एंग्री यंग मैन से कूल ओल्ड मैन बन चुके अमिताभ ने कहा लेकिन बेटा मेरे लिए खेत पर खाना लेकर कौन आएगा। इस पर अभिषेक के दिमाग़ में फिर एक आइडिया आया, उसने कहा पा फिर तो आप अमर चाचा को बुला ही लीजिए, वो ऐसा जुगाड़ करेंगे कि आपको कुछ भी करना नहीं पड़ेगा और बैठे-बिठाए बंपर फसल मिलेगी। आपको तो पता ही है कि वो कितने जुगाड़बाज़ आदमी हैं। बेटे के बग़ावती तेवर ढीले ना पड़ते देख अमिताभ को लगने लगा कि इस बार भी अपने छोटे भाई अमर की ही मदद लेनी पड़ेगी। यही सोचकर अमिताभ तभी से अमर को फोन लगाए जा रहे हैं, लेकिन उधर से कोई रेस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। सुना है वो राज ठाकरे के साथ बैठे चाय पी रहे हैं। लगता है किसान बनने का अमिताभ का सपना फिर टूट जाएगा। 

Thursday, December 30, 2010

अगर मैं राज़ की बात कह दूं तो...

अपने घर की शुद्ध देसी घी की बनी पार्टी लोकमंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह आजकल पूर्वांचल बचाने की यात्रा पर निकले हुए हैं। पता नहीं थोड़ा-बहुत बचा-खुचा बेचारा पूर्वांचल अब बच पाएगा या नहीं। क्योंकि आजकल वो जिसको भी बचाना चाह रहे हैं वही उनसे बचकर भाग रहा है। अपनी इसी बचने-बचाने की कष्टकारी यात्रा के दौरान वो दो धमकी प्रतिदिन के हिसाब से नई-नई धमकियां भी दे रहे हैं। यानि यात्रा का एक पंथ और धमकी के दो काज। अब अपने पूर्व नेता और समाजवादी (?) पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को अमर सिंह ने लेटेस्ट धमकी ये दी है कि अगर मैंने पोल खोल दी तो उन्हें जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी।
किसी नेता को जेल जाना पड़ेगा और वो सचमुच चक्की भी पीसेगा! हाय अल्लाह! किसी नेता को जेल और चक्की! इस खुशी का सदमा इस देश की मुलायम जनता सहन नही कर पाएगी और देश में दिल के दौरों का दौर चल पड़ेगा। इस काल्पनिक खुशी की आदर्श सोसाइटी से बाहर निकलकर अगर एकबारगी हम ये मान भी लें कि सचमुच मुलायम सिंह ने जेल जाने और चक्की पीसने लायक कोई छोटा सा काम किया है तो भी अभी तक के ट्रेंड को देखते हुए ये लगता तो नहीं कि वो जेल के दर्शन करेंगे। चक्की पर हाथ आज़माने की बता तो खैर आप भूल ही जाइए। क्योंकि अगर नेता लोग इतनी आसानी से जेल चले जाते तो फिर इस देश के राजा अमर ना होते और प्रजा रोज़-रोज ना मरती।
वैसे अगर ये मान भी लिया जाए कि वो सचमुच जेल जा सकते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि वो जेल जाएंगे क्यों? उनका अपराध क्या है? क्योंकि बगैर अपराध के तो इस देश में सिर्फ़ निरीह जनता ही जेल जा सकती है। यानि मुलायम सिंह जेल तभी जा सकते हैं जब उन्होंने कोई अपराध किया हो। और अगर अमर सिंह धमकी दे रहे हैं तो ज़रूर मुलायम सिंह ने कोई अपराध किया होगा और अमर सिंह को उस अपराध की जानकारी है। ये भी हम सभी जानते हैं कि हमारे कारगर क़ानून की नज़र में अपराध की जानकारी को छुपाना भी एक अपराध है। तो हमारी अपनी चुस्त-दुरुस्त पुलिस और सीबीआई से गुज़ारिश है कि वो तुरंत अमर सिंह को पकड़े और उनसे मुलायम के अपराध वाला राज़ उगलवाए। वैसे जब तक अमर सिंह खुद मेहरबानी करके देश को वो राज नहीं बता देते तब तक हम सिर्फ़ तुक्के ही लगा सकते हैं कि मुलायम सिंह ने आख़िर क्या अपराध किया होगा। हो सकता है कि मुलायम सिंह ने भी कोई घोटाला किया हो, क्योंकि यही वो सबसे आसान काम है जो हमारे नेताओं को बखूबी आता है। अगर आश्चर्यजनक किंतु सत्य की तर्ज पर कोई घोटाला नहीं किया है तो फिर उन्होंने क्या किया होगा। हे भगवान! कहीं उन्होंने कोई ऐसा-वैसा काम तो नहीं किया जिसे कराने में अमर सिंह को महारत हासिल है। अमर सिंह ने भरे दिल और रुंधे गले से ये कहा भी है कि लोग मुझे दल्ला और सप्लायर कहते हैं। मुलायम सिंह बताएं कि मैंने उन्हें क्या सप्लाई किया है। तो क्या ये डिमांड और सप्लाई का मामला है? वैसे अमर सिंह की काबलियत पर इस देश की जनता-जनार्दन को इतना तो भरोसा है कि सबसे ज़्यादा पोल इन्हीं के पास होंगी। उनकी कुछ पोलों के खुलने पर तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ही रोक लगा रखी है। शायद वो पोलें इतनी वीभत्स हैं कि उनका दबा रहना ही देश हित में है। क्योंकि अगर वो पोल खुल गईं तो पता नहीं हमाम में कौन-कौन नंगा दिखाई दे।
समाजवादी (?) पार्टी के बाक़ी नेता रोज़ चुनौती दे रहे हैं कि अगर अमर सिंह में दम है तो वो पोल खोल के दिखाएं। लेकिन अमर भैया ऐसी चुनौतियों को अपने लेवल का नहीं मान रहे। उन्हें तो अपने लेवल के यानि अपने भूतपूर्व नेताजी की मंज़ूरी का इंतज़ार है। नेताजी कहें तो वो तुरंत सारी पोल खोल देंगे। ये हुई ना कोई बात। नेताजी को छोड़ दिया, पार्टी को भी छोड़ दिया लेकिन प्रोटोकॉल नहीं छोड़ा। भाई हो तो ऐसा। भारतीय राजनीति में जीवित किंवदंती बन चुके अमर सिंह जी ने फिलहाल इशारों-इशारों में इतना तो कह ही दिया है कि हमारे ये बड़े वो हैं।

Thursday, November 18, 2010

राखी का इंसाफ़ और सरकार की नाइंसाफ़ी

लो जी अब न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी हमला हो गया, इस देश में तो भले लोगों का तो जीना ही मुश्किल है बटुकलाल जी बेहद ग़ुस्से में दिखाई दे रहे थे। बताइए वो बेचारी ऐसी ठंड में रात को नौ बजे आधे कपड़े पहनकर इंसाफ़ करती थी, सरकार को वो भी नहीं भाया रामभरोसे ने कहा। अजी भलाई का तो ज़माना ही नहीं रहा, वैसे आप किसकी बात कर रहे हैं शर्माजी ने मासूमियत से पूछा। राखी सावंत जैसी सभ्य और समझदार जज ढूंढे से भी नहीं मिलेगीबटुकलाल जी ने आंखें निकालते हुए कहा। भाईसाहब इस देश के बाक़ी जज दिन में भी इंसाफ़ नहीं कर पा रहे हैं और एक वो बेचारी रात को...रामभरोसे ने बटुकलाल से हमदर्दी जताई। अंधेर है भाईसाहब सब अंधेर है शर्मा जी ने आसमान की ओर मुंह उठाकर कहा। इसीलिए तो इन अदालतों में लाखों केस पेंडिंग पड़े हैं और एक वो राखी सावंत, वो बगैर किसी वकील के झंझट में पड़े तुरत-फुरत सारा झगड़ा मिटा देती है। महिला के रूप में साक्षात इंसाफ़ की देवी है राखी, मैं तो कहता हूं सभी अदालतों में ऐसी ही जज होनी चाहिए इतना कहकर बटुक जी ने चाय का एक लंबा घूंट भरा। वैसे हुआ क्या था, मामला क्या हैशर्मा जी ने चाय की चुस्की लेते हुए पूछा। अजी किसी को नामर्द कह दिया था रामभरोसे ने जानकारी दी। कहती तो वो पता नहीं क्या-क्या है बरसाती बाबू ने फिर रंग में भंग किया।
देखो जी अदालत का फ़ैसला सबको मानना चाहिए, अगर हमारी अनुभवी जज साहिबा किसी आरोपी को कुछ कह ही देती हैं तो उसे जज के ज्ञान और न्यायप्रियता के आगे नतमस्तक होकर फ़ैसला मंज़ूर कर लेना चाहिए था। चलो जी खैर, जब वो बेचारी इतनी मेहनत करके आधी रात को इंसाफ़ करने आएगी तो हम भी थोड़ा सा कष्ट उठाकर 11 बजे तक जग लेंगे अजी जैसा इंसाफ़ वो करती है वो तो रात के अंधेरे में ही हो सकता है बरसाती बाबू ने फिर चुटकी ली।
अजी बिग बॉस ने ही किसी का क्या बिगाड़ा है, इतने सारे लोगों को आसरा ही तो दे रखा है बटुकलाल जी बहस का एंगल दूसरी ओर घुमाया।बेचारा किसी से एक धेला लिए बगैर सुहागरात के सीन दिखाकर सबको यौन शिक्षा ही तो दे रहा था बरसाती ने फिर चुटकी से छींटे मारे। अजी जिस देश में लड़कियों को बोझ समझा जाता हो, उसी देश में ज़माने की सताई मासूम लड़कियों को इतनी मौज-मस्ती के साथ अपने घर में रखना बिग बॉस जैसे जिगरवाले का ही काम है बटुक जी ने आंखें तरेरते हुए कहा।  अपने ही देश की नहीं भाईसाहब पाकिस्तान और अमरीका तक की अनाथ और अबला लड़कियों को पनाह दे रखी है कहते हुए रामभरोसे भी बटुक के साथ हो लिए। भैय्या वो मज़े के साथ रखता ही नहीं है करोड़ों रुपए भी देता है शर्मा जी ने भी पते की बात जोड़ी। और करोड़ों रुपयों के बदले में बिग बॉस उनसे कौन सी मजूरी कराता है, वहां तो मौज-मस्ती करनी है और एक-दूसरे की चुगलखोरी करनी है बस बरसाती बाबू ने गिलास रखते हुए कहा। बताइए जी सरकार भी ऐसे धरम-करम का काम करनेवालों को ही परेशान करती है इन सब बातों से राखी सावंत या बिग बॉस डरनेवाला थोड़े ही है वो 11 बजे तो क्या रात के 12 बजे भी इंसाफ़ करके दिखा देगी। उस बेचारी ने तो पहले भी स्वयंवर रचकर कैसा नेक काम किया था बटुकलाल के चेहरे से हमदर्दी टपक रही थी।  बिग बॉस भी हार नहीं मानेगा, अब तो उसने अमरीका की पामेला एंडरसन जैसी सुशील और संकोची कन्या को भी घर में रख लिया है और अमरीका को तो आप जानते ही हो, प्रोग्राम बंद हुआ तो वो हमारी सरकार की ऐसी-तैसी कर देगा रामभरोसे के इस नीति-वाक्य के साथ ही सभा विसर्जित हो गई। चलते-चलते शर्मा जी ने फिर आसमान की ओर मुंह उठाकर ठंडी आह भर कर कहा अजी सब अंधेर है अंधेर

Wednesday, November 10, 2010

अब तो हम भी उभर चुके हैं भैय्या
देखो भाईसाब सारी दुनिया एक तरफ़ और अपना इंडिया एक तरफ़ बटुकलाल ने चहकते हुए कहा। स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जितना काला पैसा पूरी दुनिया ने जमा किया हुआ है उससे ज़्यादा तो अपने भाई-बंधुओं ने अकेले ही डाल रक्खा है। अजी अपने देश में यही सबसे बड़ी ख़राबी है, अपने ही आदमी की तरक्की से जलते हैं। रामभरोसे ने भी बटुकलाल की बात को पानी दिया। भाईसाब काला पैसा भी कसाले से कमाया जाता है, और वैसे भी पैसा काला हो या सफ़ेद, है तो अपने देश का ही। शर्माजी भी दोनों के फ़ेवर में थे। अजी जो भी हो कोई फ़ील्ड तो है जिसमें अपना इंडिया सबसे आगे है, ये कोई छोटी-मोटी बात है भला। बटुक ने बात जारी रखी। मैं तो पहले से ही कहता था कि अपना इंडिया उभर चुका है। अब बटुक उत्तेजित हो चले थे। अब ओबामा ने भी कह दिया है तो अब तो सब मानेंगे ही। अजी अपने देश वाले तो अभी तक यही माने बैठे थे कि हम उभरती हुई ताक़त हैं, वो तो भला हो ओबामा को जिसने बता दिया कि पागलो! तुम आलरेडी उभर चुके हो, तब कहीं जाकर लोगों को फ़ील हुआ उभरने का। इस बार शर्माजी ने राय भी रखी। भाईसाब ओबामा को भी पहले कुछ पता-वता नहीं था, उसे भी यहीं आकर पता चला था कहते हुए बरसातीलाल भी मैदान में कूद पड़े। जब ओबामा ने यहां आकर देखा कि एक-एक नेता और अफ़सर हज़ारों करोड़ रुपए खाकर डकार तक नहीं लेता तो वो हमें मान गया और उसे कहना ही पड़ा कि भैय्या तुम तो कब के उभर चुके हो। बरसाती ने बरसना जारी रखा। और तो और ओबामा ने तो हमारे पीएम को अपना निजी दोस्त भी मान लिया है, अगर हम अभी उभर ही रहे होते तो वो पीएम को निजी के बजाय सार्वजनिक दोस्त ना बताता। बात तो पते की है भाईसाब!” शर्माजी ने पाला बदला। और अब तो अमरीका हमें सुरक्षा परिषद की मेंबरशिप भी दिलाने वाला है, अब तो दुनिया में बस हम ही हम होंगे। बटुकलाल का चेहरा मारे खुशी के एक्स्ट्रा लार्ज हुए जा रहा था। अजी रहने दो, उधर एशियाड में अपना हाल देखा, चीन के 200 गोल्ड मेडल और हमारे 20 भी नहीं हो पाए। बरसाती ने रंग में भंग किया। इन्हें तो हर टाइम बस कमियां ही दिखती हैं। पता भी है चीन कब से सुरक्षा परिषद का मेंबर है, एक बार हम भी मेंबर बन गए ना, तो फिर देखना हमारे मेडल। बरसाती की धुलाई के बाद बटुकलाल के चेहरे का साइज़ थोड़ा सिकुड़ गया था। बरसाती को शायद ये भी नहीं पता कि अपना इंडिया दुनिया का सबसे युवतम देश है यानि सबसे ज़्यादा युवा लोग अपने यहीं हैं। शर्माजी ने एक बार फिर इनपुट दिया। और हमारे ये करोड़ों युवा मुंह में गुटखा और सीने में हवा भरकर दुनिया को क़दमों में झुकाने को तैयार खड़े हैं। बरसाती ने फिर सुर बिगाड़ा। बरसाती अगर अख़बार पढ़ता तो पता होता कि अमरीकी मैगजीन ने हमारे पीएम को अपनी लिस्ट में टॉप पे रखा है। इतना कहकर बटुक ने चाय का खाली गिलास रखा और शर्माजी को चलने का इशारा किया। पीएम तो ख़ैर जहां हैं सो हैं पर भैय्या उसी लिस्ट में देश तो 78वें नंबर पर पड़ा हुआ है। कहते हुए बरसाती बाबू भी उठ खड़े हुए। अजी जब अमरीका की मेहरबानी से पीएम पहले नंबर पर आ गए हैं तो एक दिन देश भी नंबर वन हो ही जाएगा। इतना कहकर रामभरोसे ने भी चाय ख़त्म कर घर की राह ली।