Wednesday, November 10, 2010

अब तो हम भी उभर चुके हैं भैय्या
देखो भाईसाब सारी दुनिया एक तरफ़ और अपना इंडिया एक तरफ़ बटुकलाल ने चहकते हुए कहा। स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जितना काला पैसा पूरी दुनिया ने जमा किया हुआ है उससे ज़्यादा तो अपने भाई-बंधुओं ने अकेले ही डाल रक्खा है। अजी अपने देश में यही सबसे बड़ी ख़राबी है, अपने ही आदमी की तरक्की से जलते हैं। रामभरोसे ने भी बटुकलाल की बात को पानी दिया। भाईसाब काला पैसा भी कसाले से कमाया जाता है, और वैसे भी पैसा काला हो या सफ़ेद, है तो अपने देश का ही। शर्माजी भी दोनों के फ़ेवर में थे। अजी जो भी हो कोई फ़ील्ड तो है जिसमें अपना इंडिया सबसे आगे है, ये कोई छोटी-मोटी बात है भला। बटुक ने बात जारी रखी। मैं तो पहले से ही कहता था कि अपना इंडिया उभर चुका है। अब बटुक उत्तेजित हो चले थे। अब ओबामा ने भी कह दिया है तो अब तो सब मानेंगे ही। अजी अपने देश वाले तो अभी तक यही माने बैठे थे कि हम उभरती हुई ताक़त हैं, वो तो भला हो ओबामा को जिसने बता दिया कि पागलो! तुम आलरेडी उभर चुके हो, तब कहीं जाकर लोगों को फ़ील हुआ उभरने का। इस बार शर्माजी ने राय भी रखी। भाईसाब ओबामा को भी पहले कुछ पता-वता नहीं था, उसे भी यहीं आकर पता चला था कहते हुए बरसातीलाल भी मैदान में कूद पड़े। जब ओबामा ने यहां आकर देखा कि एक-एक नेता और अफ़सर हज़ारों करोड़ रुपए खाकर डकार तक नहीं लेता तो वो हमें मान गया और उसे कहना ही पड़ा कि भैय्या तुम तो कब के उभर चुके हो। बरसाती ने बरसना जारी रखा। और तो और ओबामा ने तो हमारे पीएम को अपना निजी दोस्त भी मान लिया है, अगर हम अभी उभर ही रहे होते तो वो पीएम को निजी के बजाय सार्वजनिक दोस्त ना बताता। बात तो पते की है भाईसाब!” शर्माजी ने पाला बदला। और अब तो अमरीका हमें सुरक्षा परिषद की मेंबरशिप भी दिलाने वाला है, अब तो दुनिया में बस हम ही हम होंगे। बटुकलाल का चेहरा मारे खुशी के एक्स्ट्रा लार्ज हुए जा रहा था। अजी रहने दो, उधर एशियाड में अपना हाल देखा, चीन के 200 गोल्ड मेडल और हमारे 20 भी नहीं हो पाए। बरसाती ने रंग में भंग किया। इन्हें तो हर टाइम बस कमियां ही दिखती हैं। पता भी है चीन कब से सुरक्षा परिषद का मेंबर है, एक बार हम भी मेंबर बन गए ना, तो फिर देखना हमारे मेडल। बरसाती की धुलाई के बाद बटुकलाल के चेहरे का साइज़ थोड़ा सिकुड़ गया था। बरसाती को शायद ये भी नहीं पता कि अपना इंडिया दुनिया का सबसे युवतम देश है यानि सबसे ज़्यादा युवा लोग अपने यहीं हैं। शर्माजी ने एक बार फिर इनपुट दिया। और हमारे ये करोड़ों युवा मुंह में गुटखा और सीने में हवा भरकर दुनिया को क़दमों में झुकाने को तैयार खड़े हैं। बरसाती ने फिर सुर बिगाड़ा। बरसाती अगर अख़बार पढ़ता तो पता होता कि अमरीकी मैगजीन ने हमारे पीएम को अपनी लिस्ट में टॉप पे रखा है। इतना कहकर बटुक ने चाय का खाली गिलास रखा और शर्माजी को चलने का इशारा किया। पीएम तो ख़ैर जहां हैं सो हैं पर भैय्या उसी लिस्ट में देश तो 78वें नंबर पर पड़ा हुआ है। कहते हुए बरसाती बाबू भी उठ खड़े हुए। अजी जब अमरीका की मेहरबानी से पीएम पहले नंबर पर आ गए हैं तो एक दिन देश भी नंबर वन हो ही जाएगा। इतना कहकर रामभरोसे ने भी चाय ख़त्म कर घर की राह ली।

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