‘लो जी अब न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी हमला हो गया, इस देश में तो भले लोगों का तो जीना ही मुश्किल है’ बटुकलाल जी बेहद ग़ुस्से में दिखाई दे रहे थे। ‘बताइए वो बेचारी ऐसी ठंड में रात को नौ बजे आधे कपड़े पहनकर इंसाफ़ करती थी, सरकार को वो भी नहीं भाया’ रामभरोसे ने कहा। ‘अजी भलाई का तो ज़माना ही नहीं रहा, वैसे आप किसकी बात कर रहे हैं’ शर्माजी ने मासूमियत से पूछा। ‘राखी सावंत जैसी सभ्य और समझदार जज ढूंढे से भी नहीं मिलेगी’ बटुकलाल जी ने आंखें निकालते हुए कहा। ‘भाईसाहब इस देश के बाक़ी जज दिन में भी इंसाफ़ नहीं कर पा रहे हैं और एक वो बेचारी रात को...’ रामभरोसे ने बटुकलाल से हमदर्दी जताई। ‘अंधेर है भाईसाहब सब अंधेर है’ शर्मा जी ने आसमान की ओर मुंह उठाकर कहा। ‘इसीलिए तो इन अदालतों में लाखों केस पेंडिंग पड़े हैं और एक वो राखी सावंत, वो बगैर किसी वकील के झंझट में पड़े तुरत-फुरत सारा झगड़ा मिटा देती है। महिला के रूप में साक्षात इंसाफ़ की देवी है राखी, मैं तो कहता हूं सभी अदालतों में ऐसी ही जज होनी चाहिए’ इतना कहकर बटुक जी ने चाय का एक लंबा घूंट भरा। ‘वैसे हुआ क्या था, मामला क्या है’ शर्मा जी ने चाय की चुस्की लेते हुए पूछा। ‘अजी किसी को नामर्द कह दिया था’ रामभरोसे ने जानकारी दी। ‘कहती तो वो पता नहीं क्या-क्या है’ बरसाती बाबू ने फिर रंग में भंग किया।
‘देखो जी अदालत का फ़ैसला सबको मानना चाहिए, अगर हमारी अनुभवी जज साहिबा किसी आरोपी को कुछ कह ही देती हैं तो उसे जज के ज्ञान और न्यायप्रियता के आगे नतमस्तक होकर फ़ैसला मंज़ूर कर लेना चाहिए था। चलो जी खैर, जब वो बेचारी इतनी मेहनत करके आधी रात को इंसाफ़ करने आएगी तो हम भी थोड़ा सा कष्ट उठाकर 11 बजे तक जग लेंगे’ ‘अजी जैसा इंसाफ़ वो करती है वो तो रात के अंधेरे में ही हो सकता है’ बरसाती बाबू ने फिर चुटकी ली।
‘अजी बिग बॉस ने ही किसी का क्या बिगाड़ा है, इतने सारे लोगों को आसरा ही तो दे रखा है’ बटुकलाल जी बहस का एंगल दूसरी ओर घुमाया। ‘बेचारा किसी से एक धेला लिए बगैर सुहागरात के सीन दिखाकर सबको यौन शिक्षा ही तो दे रहा था’ बरसाती ने फिर चुटकी से छींटे मारे। ‘अजी जिस देश में लड़कियों को बोझ समझा जाता हो, उसी देश में ज़माने की सताई मासूम लड़कियों को इतनी मौज-मस्ती के साथ अपने घर में रखना बिग बॉस जैसे जिगरवाले का ही काम है’ बटुक जी ने आंखें तरेरते हुए कहा। ‘अपने ही देश की नहीं भाईसाहब पाकिस्तान और अमरीका तक की अनाथ और अबला लड़कियों को पनाह दे रखी है’ कहते हुए रामभरोसे भी बटुक के साथ हो लिए। ‘भैय्या वो मज़े के साथ रखता ही नहीं है करोड़ों रुपए भी देता है’ शर्मा जी ने भी पते की बात जोड़ी। ‘और करोड़ों रुपयों के बदले में बिग बॉस उनसे कौन सी मजूरी कराता है, वहां तो मौज-मस्ती करनी है और एक-दूसरे की चुगलखोरी करनी है बस’ बरसाती बाबू ने गिलास रखते हुए कहा। ‘बताइए जी सरकार भी ऐसे धरम-करम का काम करनेवालों को ही परेशान करती है इन सब बातों से राखी सावंत या बिग बॉस डरनेवाला थोड़े ही है वो 11 बजे तो क्या रात के 12 बजे भी इंसाफ़ करके दिखा देगी। उस बेचारी ने तो पहले भी स्वयंवर रचकर कैसा नेक काम किया था’ बटुकलाल के चेहरे से हमदर्दी टपक रही थी। ‘बिग बॉस भी हार नहीं मानेगा, अब तो उसने अमरीका की पामेला एंडरसन जैसी सुशील और संकोची कन्या को भी घर में रख लिया है और अमरीका को तो आप जानते ही हो, प्रोग्राम बंद हुआ तो वो हमारी सरकार की ऐसी-तैसी कर देगा’ रामभरोसे के इस नीति-वाक्य के साथ ही सभा विसर्जित हो गई। चलते-चलते शर्मा जी ने फिर आसमान की ओर मुंह उठाकर ठंडी आह भर कर कहा ‘अजी सब अंधेर है अंधेर’
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