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Thursday, December 30, 2010

अगर मैं राज़ की बात कह दूं तो...

अपने घर की शुद्ध देसी घी की बनी पार्टी लोकमंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह आजकल पूर्वांचल बचाने की यात्रा पर निकले हुए हैं। पता नहीं थोड़ा-बहुत बचा-खुचा बेचारा पूर्वांचल अब बच पाएगा या नहीं। क्योंकि आजकल वो जिसको भी बचाना चाह रहे हैं वही उनसे बचकर भाग रहा है। अपनी इसी बचने-बचाने की कष्टकारी यात्रा के दौरान वो दो धमकी प्रतिदिन के हिसाब से नई-नई धमकियां भी दे रहे हैं। यानि यात्रा का एक पंथ और धमकी के दो काज। अब अपने पूर्व नेता और समाजवादी (?) पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को अमर सिंह ने लेटेस्ट धमकी ये दी है कि अगर मैंने पोल खोल दी तो उन्हें जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी।
किसी नेता को जेल जाना पड़ेगा और वो सचमुच चक्की भी पीसेगा! हाय अल्लाह! किसी नेता को जेल और चक्की! इस खुशी का सदमा इस देश की मुलायम जनता सहन नही कर पाएगी और देश में दिल के दौरों का दौर चल पड़ेगा। इस काल्पनिक खुशी की आदर्श सोसाइटी से बाहर निकलकर अगर एकबारगी हम ये मान भी लें कि सचमुच मुलायम सिंह ने जेल जाने और चक्की पीसने लायक कोई छोटा सा काम किया है तो भी अभी तक के ट्रेंड को देखते हुए ये लगता तो नहीं कि वो जेल के दर्शन करेंगे। चक्की पर हाथ आज़माने की बता तो खैर आप भूल ही जाइए। क्योंकि अगर नेता लोग इतनी आसानी से जेल चले जाते तो फिर इस देश के राजा अमर ना होते और प्रजा रोज़-रोज ना मरती।
वैसे अगर ये मान भी लिया जाए कि वो सचमुच जेल जा सकते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि वो जेल जाएंगे क्यों? उनका अपराध क्या है? क्योंकि बगैर अपराध के तो इस देश में सिर्फ़ निरीह जनता ही जेल जा सकती है। यानि मुलायम सिंह जेल तभी जा सकते हैं जब उन्होंने कोई अपराध किया हो। और अगर अमर सिंह धमकी दे रहे हैं तो ज़रूर मुलायम सिंह ने कोई अपराध किया होगा और अमर सिंह को उस अपराध की जानकारी है। ये भी हम सभी जानते हैं कि हमारे कारगर क़ानून की नज़र में अपराध की जानकारी को छुपाना भी एक अपराध है। तो हमारी अपनी चुस्त-दुरुस्त पुलिस और सीबीआई से गुज़ारिश है कि वो तुरंत अमर सिंह को पकड़े और उनसे मुलायम के अपराध वाला राज़ उगलवाए। वैसे जब तक अमर सिंह खुद मेहरबानी करके देश को वो राज नहीं बता देते तब तक हम सिर्फ़ तुक्के ही लगा सकते हैं कि मुलायम सिंह ने आख़िर क्या अपराध किया होगा। हो सकता है कि मुलायम सिंह ने भी कोई घोटाला किया हो, क्योंकि यही वो सबसे आसान काम है जो हमारे नेताओं को बखूबी आता है। अगर आश्चर्यजनक किंतु सत्य की तर्ज पर कोई घोटाला नहीं किया है तो फिर उन्होंने क्या किया होगा। हे भगवान! कहीं उन्होंने कोई ऐसा-वैसा काम तो नहीं किया जिसे कराने में अमर सिंह को महारत हासिल है। अमर सिंह ने भरे दिल और रुंधे गले से ये कहा भी है कि लोग मुझे दल्ला और सप्लायर कहते हैं। मुलायम सिंह बताएं कि मैंने उन्हें क्या सप्लाई किया है। तो क्या ये डिमांड और सप्लाई का मामला है? वैसे अमर सिंह की काबलियत पर इस देश की जनता-जनार्दन को इतना तो भरोसा है कि सबसे ज़्यादा पोल इन्हीं के पास होंगी। उनकी कुछ पोलों के खुलने पर तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ही रोक लगा रखी है। शायद वो पोलें इतनी वीभत्स हैं कि उनका दबा रहना ही देश हित में है। क्योंकि अगर वो पोल खुल गईं तो पता नहीं हमाम में कौन-कौन नंगा दिखाई दे।
समाजवादी (?) पार्टी के बाक़ी नेता रोज़ चुनौती दे रहे हैं कि अगर अमर सिंह में दम है तो वो पोल खोल के दिखाएं। लेकिन अमर भैया ऐसी चुनौतियों को अपने लेवल का नहीं मान रहे। उन्हें तो अपने लेवल के यानि अपने भूतपूर्व नेताजी की मंज़ूरी का इंतज़ार है। नेताजी कहें तो वो तुरंत सारी पोल खोल देंगे। ये हुई ना कोई बात। नेताजी को छोड़ दिया, पार्टी को भी छोड़ दिया लेकिन प्रोटोकॉल नहीं छोड़ा। भाई हो तो ऐसा। भारतीय राजनीति में जीवित किंवदंती बन चुके अमर सिंह जी ने फिलहाल इशारों-इशारों में इतना तो कह ही दिया है कि हमारे ये बड़े वो हैं।

Wednesday, November 10, 2010

अब तो हम भी उभर चुके हैं भैय्या
देखो भाईसाब सारी दुनिया एक तरफ़ और अपना इंडिया एक तरफ़ बटुकलाल ने चहकते हुए कहा। स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जितना काला पैसा पूरी दुनिया ने जमा किया हुआ है उससे ज़्यादा तो अपने भाई-बंधुओं ने अकेले ही डाल रक्खा है। अजी अपने देश में यही सबसे बड़ी ख़राबी है, अपने ही आदमी की तरक्की से जलते हैं। रामभरोसे ने भी बटुकलाल की बात को पानी दिया। भाईसाब काला पैसा भी कसाले से कमाया जाता है, और वैसे भी पैसा काला हो या सफ़ेद, है तो अपने देश का ही। शर्माजी भी दोनों के फ़ेवर में थे। अजी जो भी हो कोई फ़ील्ड तो है जिसमें अपना इंडिया सबसे आगे है, ये कोई छोटी-मोटी बात है भला। बटुक ने बात जारी रखी। मैं तो पहले से ही कहता था कि अपना इंडिया उभर चुका है। अब बटुक उत्तेजित हो चले थे। अब ओबामा ने भी कह दिया है तो अब तो सब मानेंगे ही। अजी अपने देश वाले तो अभी तक यही माने बैठे थे कि हम उभरती हुई ताक़त हैं, वो तो भला हो ओबामा को जिसने बता दिया कि पागलो! तुम आलरेडी उभर चुके हो, तब कहीं जाकर लोगों को फ़ील हुआ उभरने का। इस बार शर्माजी ने राय भी रखी। भाईसाब ओबामा को भी पहले कुछ पता-वता नहीं था, उसे भी यहीं आकर पता चला था कहते हुए बरसातीलाल भी मैदान में कूद पड़े। जब ओबामा ने यहां आकर देखा कि एक-एक नेता और अफ़सर हज़ारों करोड़ रुपए खाकर डकार तक नहीं लेता तो वो हमें मान गया और उसे कहना ही पड़ा कि भैय्या तुम तो कब के उभर चुके हो। बरसाती ने बरसना जारी रखा। और तो और ओबामा ने तो हमारे पीएम को अपना निजी दोस्त भी मान लिया है, अगर हम अभी उभर ही रहे होते तो वो पीएम को निजी के बजाय सार्वजनिक दोस्त ना बताता। बात तो पते की है भाईसाब!” शर्माजी ने पाला बदला। और अब तो अमरीका हमें सुरक्षा परिषद की मेंबरशिप भी दिलाने वाला है, अब तो दुनिया में बस हम ही हम होंगे। बटुकलाल का चेहरा मारे खुशी के एक्स्ट्रा लार्ज हुए जा रहा था। अजी रहने दो, उधर एशियाड में अपना हाल देखा, चीन के 200 गोल्ड मेडल और हमारे 20 भी नहीं हो पाए। बरसाती ने रंग में भंग किया। इन्हें तो हर टाइम बस कमियां ही दिखती हैं। पता भी है चीन कब से सुरक्षा परिषद का मेंबर है, एक बार हम भी मेंबर बन गए ना, तो फिर देखना हमारे मेडल। बरसाती की धुलाई के बाद बटुकलाल के चेहरे का साइज़ थोड़ा सिकुड़ गया था। बरसाती को शायद ये भी नहीं पता कि अपना इंडिया दुनिया का सबसे युवतम देश है यानि सबसे ज़्यादा युवा लोग अपने यहीं हैं। शर्माजी ने एक बार फिर इनपुट दिया। और हमारे ये करोड़ों युवा मुंह में गुटखा और सीने में हवा भरकर दुनिया को क़दमों में झुकाने को तैयार खड़े हैं। बरसाती ने फिर सुर बिगाड़ा। बरसाती अगर अख़बार पढ़ता तो पता होता कि अमरीकी मैगजीन ने हमारे पीएम को अपनी लिस्ट में टॉप पे रखा है। इतना कहकर बटुक ने चाय का खाली गिलास रखा और शर्माजी को चलने का इशारा किया। पीएम तो ख़ैर जहां हैं सो हैं पर भैय्या उसी लिस्ट में देश तो 78वें नंबर पर पड़ा हुआ है। कहते हुए बरसाती बाबू भी उठ खड़े हुए। अजी जब अमरीका की मेहरबानी से पीएम पहले नंबर पर आ गए हैं तो एक दिन देश भी नंबर वन हो ही जाएगा। इतना कहकर रामभरोसे ने भी चाय ख़त्म कर घर की राह ली।