अपने घर की शुद्ध देसी घी की बनी पार्टी लोकमंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह आजकल पूर्वांचल बचाने की यात्रा पर निकले हुए हैं। पता नहीं थोड़ा-बहुत बचा-खुचा बेचारा पूर्वांचल अब बच पाएगा या नहीं। क्योंकि आजकल वो जिसको भी बचाना चाह रहे हैं वही उनसे बचकर भाग रहा है। अपनी इसी बचने-बचाने की कष्टकारी यात्रा के दौरान वो दो धमकी प्रतिदिन के हिसाब से नई-नई धमकियां भी दे रहे हैं। यानि यात्रा का एक पंथ और धमकी के दो काज। अब अपने पूर्व नेता और समाजवादी (?) पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को अमर सिंह ने लेटेस्ट धमकी ये दी है कि अगर मैंने पोल खोल दी तो उन्हें जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी।
किसी नेता को जेल जाना पड़ेगा और वो सचमुच चक्की भी पीसेगा! हाय अल्लाह! किसी नेता को जेल और चक्की! इस खुशी का सदमा इस देश की ‘मुलायम’ जनता सहन नही कर पाएगी और देश में दिल के दौरों का दौर चल पड़ेगा। इस काल्पनिक खुशी की ‘आदर्श सोसाइटी’ से बाहर निकलकर अगर एकबारगी हम ये मान भी लें कि सचमुच मुलायम सिंह ने जेल जाने और चक्की पीसने लायक कोई छोटा सा काम किया है तो भी अभी तक के ट्रेंड को देखते हुए ये लगता तो नहीं कि वो जेल के दर्शन करेंगे। चक्की पर हाथ आज़माने की बता तो खैर आप भूल ही जाइए। क्योंकि अगर नेता लोग इतनी आसानी से जेल चले जाते तो फिर इस देश के ‘राजा’ ‘अमर’ ना होते और ‘प्रजा’ रोज़-रोज ना मरती।
वैसे अगर ये मान भी लिया जाए कि वो सचमुच जेल जा सकते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि वो जेल जाएंगे क्यों? उनका अपराध क्या है? क्योंकि बगैर अपराध के तो इस देश में सिर्फ़ निरीह जनता ही जेल जा सकती है। यानि मुलायम सिंह जेल तभी जा सकते हैं जब उन्होंने कोई अपराध किया हो। और अगर अमर सिंह धमकी दे रहे हैं तो ज़रूर मुलायम सिंह ने कोई अपराध किया होगा और अमर सिंह को उस अपराध की जानकारी है। ये भी हम सभी जानते हैं कि हमारे कारगर क़ानून की नज़र में अपराध की जानकारी को छुपाना भी एक अपराध है। तो हमारी अपनी चुस्त-दुरुस्त पुलिस और सीबीआई से गुज़ारिश है कि वो तुरंत अमर सिंह को पकड़े और उनसे मुलायम के अपराध वाला राज़ उगलवाए। वैसे जब तक अमर सिंह खुद मेहरबानी करके देश को वो राज नहीं बता देते तब तक हम सिर्फ़ तुक्के ही लगा सकते हैं कि मुलायम सिंह ने आख़िर क्या अपराध किया होगा। हो सकता है कि मुलायम सिंह ने भी कोई घोटाला किया हो, क्योंकि यही वो सबसे आसान काम है जो हमारे नेताओं को बखूबी आता है। अगर आश्चर्यजनक किंतु सत्य की तर्ज पर कोई घोटाला नहीं किया है तो फिर उन्होंने क्या किया होगा। हे भगवान! कहीं उन्होंने कोई ऐसा-वैसा काम तो नहीं किया जिसे कराने में अमर सिंह को महारत हासिल है। अमर सिंह ने भरे दिल और रुंधे गले से ये कहा भी है कि “लोग मुझे दल्ला और सप्लायर कहते हैं। मुलायम सिंह बताएं कि मैंने उन्हें क्या सप्लाई किया है।” तो क्या ये डिमांड और सप्लाई का मामला है? वैसे अमर सिंह की काबलियत पर इस देश की जनता-जनार्दन को इतना तो भरोसा है कि सबसे ज़्यादा पोल इन्हीं के पास होंगी। उनकी कुछ पोलों के खुलने पर तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ही रोक लगा रखी है। शायद वो पोलें इतनी वीभत्स हैं कि उनका दबा रहना ही देश हित में है। क्योंकि अगर वो पोल खुल गईं तो पता नहीं हमाम में कौन-कौन नंगा दिखाई दे।
समाजवादी (?) पार्टी के बाक़ी नेता रोज़ चुनौती दे रहे हैं कि अगर अमर सिंह में दम है तो वो पोल खोल के दिखाएं। लेकिन अमर भैया ऐसी चुनौतियों को अपने लेवल का नहीं मान रहे। उन्हें तो अपने लेवल के यानि अपने भूतपूर्व नेताजी की मंज़ूरी का इंतज़ार है। नेताजी कहें तो वो तुरंत सारी पोल खोल देंगे। ये हुई ना कोई बात। नेताजी को छोड़ दिया, पार्टी को भी छोड़ दिया लेकिन प्रोटोकॉल नहीं छोड़ा। भाई हो तो ऐसा। भारतीय राजनीति में जीवित किंवदंती बन चुके अमर सिंह जी ने फिलहाल इशारों-इशारों में इतना तो कह ही दिया है कि हमारे ‘ये’ बड़े ‘वो’ हैं।